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मुजफ्फरपुर आश्रय गृह से 10 बच्चे लापता, 4 मूक-बधिर भी शामिल; टूटी ग्रिल और CCTV फुटेज से बढ़ी चिंता

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मुजफ्फरपुर के नरौली स्थित वृहद आश्रय गृह से 10 बच्चे अचानक लापता हो गए हैं। इनमें चार मूक-बधिर बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और नेपाल कनेक्शन के एंगल से जांच कर रही है।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद चिंताजनक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुशहरी थाना क्षेत्र के नरौली गांव स्थित वृहद आश्रय गृह से एक साथ 10 बच्चों के रहस्यमय तरीके से गायब होने की घटना ने प्रशासन और पुलिस विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड में ला दिया है। सबसे गंभीर बात यह है कि लापता बच्चों में चार मूक-बधिर बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और आश्रय गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, आश्रय गृह में तैनात गार्ड ने जब बच्चों की गिनती की तो 10 बच्चों के गायब होने का पता चला। इसके बाद तत्काल इसकी सूचना गृह प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सभी बच्चे रविवार देर रात से सोमवार तड़के के बीच लापता हुए हैं।

आश्रय गृह के अधीक्षक अविनाश डे ने अधिकारियों को बताया कि संस्थान में उस समय कुल 46 बच्चे रह रहे थे। बच्चों को अलग-अलग हॉल में रखा गया था। प्रथम तल पर बने एक हॉल में कुछ बच्चे ठहरे हुए थे, जहां से अचानक 10 बच्चों के गायब होने की जानकारी सामने आई। जांच के दौरान प्रथम तल की एक खिड़की की ग्रिल टूटी हुई मिली, जिसके बाद यह आशंका जताई जा रही है कि बच्चे उसी रास्ते बाहर निकले होंगे।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक संभावना है कि बच्चे टूटी हुई ग्रिल से निकलकर पाइप के सहारे नीचे उतरे और फिर मुख्य गेट के आसपास से बाहर चले गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षा गार्डों को इस पूरी घटना की भनक तक नहीं लगी। प्रारंभिक जांच में लापरवाही के संकेत मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल पुलिस की कई टीमों को बच्चों की तलाश में लगा दिया है। मुजफ्फरपुर पुलिस आसपास के इलाकों के अलावा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और संभावित मार्गों पर लगातार सर्च अभियान चला रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है ताकि बच्चों का कोई सुराग मिल सके।

जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग भी मिला है। नरौली चौक पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में देर रात कुछ बच्चे जाते हुए दिखाई दिए हैं। फुटेज में बच्चों की गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं, लेकिन उसके बाद वे किस दिशा में गए, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस अब आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाल रही है ताकि बच्चों की अंतिम लोकेशन और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

इस मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि लापता बच्चों में शामिल एक नेपाली मूल का बच्चा अक्सर अन्य बच्चों से नेपाल घुमाने ले जाने की बात करता था। इस जानकारी के बाद पुलिस अब नेपाल कनेक्शन के एंगल से भी जांच कर रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यदि बच्चे वास्तव में पैदल निकले हैं तो वे अलग-अलग दिशाओं में भी जा सकते हैं। देर रात होने के कारण उस समय वाहनों की आवाजाही कम थी, इसलिए यह भी संभावना जताई जा रही है कि बच्चे किसी वाहन के बजाय पैदल आगे बढ़े हों। फिलहाल पुलिस बच्चों की तलाश में लगातार छापेमारी और पूछताछ कर रही है।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी भारी नाराजगी और चिंता देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि जिस संस्थान में बेसहारा और विशेष जरूरत वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वहां से एक साथ 10 बच्चों का गायब हो जाना बेहद गंभीर मामला है। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने भी माना है कि मामला बेहद संवेदनशील है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित बरामद करना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं घटना के पीछे किसी बाहरी व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं है। हालांकि अभी तक किसी प्रकार की आपराधिक साजिश की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

उधर, बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों ने भी पूरे मामले पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आश्रय गृहों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब वहां विशेष जरूरत वाले बच्चे भी रह रहे हों। इस घटना ने राज्य के अन्य बाल संरक्षण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के बाद आश्रय गृह के कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। ड्यूटी पर मौजूद गार्डों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी घटना कैसे हो गई और सुरक्षा में कहां चूक हुई।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार बच्चों की तलाश में जुटी हुई हैं। हर गुजरते घंटे के साथ चिंता बढ़ती जा रही है। परिजन और स्थानीय लोग बच्चों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पूरे जिले में इस घटना को लेकर बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

अब सबकी नजर पुलिस जांच और सर्च ऑपरेशन पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और पूछताछ के आधार पर जल्द ही इस रहस्यमय मामले से पर्दा उठ सकता है। लेकिन फिलहाल 10 मासूम बच्चों का एक साथ गायब होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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